उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र केवल जौनसार क्षेत्र में निवास के आधार पर जारी किए जा सकते हैं, या फिर इन्हें केवल मान्यता प्राप्त समुदायों से संबंधित व्यक्तियों को ही दिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति राकेश थापलियाल की एकल पीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि अब तक कितने लोगों को महज निवास का आधार मानकर ST प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

More Stories
केन्द्र सरकार द्वारा ऋषिकेश में विद्युत लाईनों को भूमिगत किये जाने हेतु प्रदान की गई ₹489 करोड़ की धनराशि
ग्लेशियर झीलों की प्रभावी निगरानी जरूरी-मुख्य सचिव, जल्द शुरू हो उपकरण लगाए जाने का कार्य
आयुक्त गढ़वाल द्वारा की गई श्री केदारनाथ यात्रा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा, अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश