उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र केवल जौनसार क्षेत्र में निवास के आधार पर जारी किए जा सकते हैं, या फिर इन्हें केवल मान्यता प्राप्त समुदायों से संबंधित व्यक्तियों को ही दिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति राकेश थापलियाल की एकल पीठ ने राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि अब तक कितने लोगों को महज निवास का आधार मानकर ST प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

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