उन्नाव रेप केस में उम्र कैद की सजा काट रहे भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने बेल दे दी है। अदालत ने चार शर्तों के साथ कुलदीप सेंगर को रिहा करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट के फैसले को जानिए
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने सेंगर की सजा को अपील पर सुनवाई पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया। सेंगर ने सजा के खिलाफ अपील की थी। अदालत ने कुलदीप सिंह सेंगर को 15 लाख रुपए के निजी मुचलके पर सशर्त रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही 4 शर्तें भी लगाईं है
-पीड़ित से 5 किमी दूर रहना होगा।
-हर सोमवार को पुलिस को रिपोर्ट करना होगा।
-पासपोर्ट संबंधित प्राधिकरण के पास जमा कराना होगा, ताकि देश छोड़कर न जा सकें।
-एक भी शर्त तोड़ी तो बेल रद्द कर दी जाएगी।
धरने से पुलिस ने जबरन हटाया
इस फैसले से नाराज होकर पीड़िता और उसकी मां न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गईं। धरने के दौरान सोशल एक्टिविस्ट योगिता भयाना भी पीड़िता के साथ मौजूद थीं। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़िता और उनकी मां को जबरन वहां से हटा दिया। पुलिस की इस कार्रवाई पर भी पीड़िता ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और साफ किया कि वह हार नहीं मानेंगी और अपनी लड़ाई जारी रखेंगी
“6 साल में जमानत कैसा न्याय?”
पीड़िता ने प्रशासन पर कई सवाल उठाए है। उनका कहना है कि जिस अपराधी को ताउम्र जेल में रहना था, उसे महज 6 साल में बाहर आने की अनुमति कैसे मिल गई? पीड़िता ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा, “दोषी के बाहर आने से मेरी जान को फिर से खतरा है। मेरे पिता की हत्या हुई, मेरा एक्सीडेंट कराया गया, अब फिर वही डर सता रहा है। यह न्याय नहीं है, मैं इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी।”
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि 2017 में उत्तरप्रदेश के उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का मामला सामने आया था। इस मामले में बीजेपी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सेंगर पर 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया था। कुलदीप सेंगर की विधानसभा सदस्यता भी रद्द कर दी गई थी। उसे भाजपा ने पार्टी से निकाल दिया था। अब जमानत मिलने के बाद पीड़िता और उसके परिवार को फिर से खतरे की आशंका सता रही है। पीड़िता ने केंद्र और राज्य सरकार से सुरक्षा की मांग भी की है।

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