ग्रीन सेस काटने का प्रावधान अब प्रदेशभर में लागू होने को है। परिवहन विभाग ने प्रदेश में 37 ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरा लगाए हुए हैं, जिनमें से 15 राज्य की सीमाओं के प्रवेश पर हैं।
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार प्रदेश में ग्रीन सेस वसूली का दूसरा ट्रायल सफल हो गया। हरिद्वार के नारसन बॉर्डर स्थित एएनपीआर कैमरे के माध्यम से कुछ बाहरी राज्यों के वाहनों का ग्रीन सेस काटा गया। हालांकि प्रक्रिया धीमी होने के चलते अभी आईटीडीए इसका सिस्टम अपडेट कर रहा है
बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से एक निश्चित धनराशि बतौर ग्रीन सेस काटने का प्रावधान अब प्रदेशभर में लागू होने को है। परिवहन विभाग ने प्रदेश में 37 ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरा लगाए हुए हैं, जिनमें से 15 राज्य की सीमाओं के प्रवेश पर हैं। इन सभी के माध्यम से प्रदेश में आने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों से ग्रीन सेस काटा जाएगा।
फिलहाल हरिद्वार के नारसन स्थित चेकपोस्ट के कैमरा ने डाटा भेजना शुरू कर दिया है, जिससे कुछ वाहनों का ग्रीन सेस नंबर प्लेट के माध्यम से फास्टैग खाते से काटा गया है।परिवहन मुख्यालय के मुताबिक, कैमरा आईटीडीए के डाटा सेंटर में वाहनों की वीडियो भेजता है।
इस वीडियो से वाहनों की छंटनी होने के बाद बाहरी राज्यों के नंबर प्लेट के हिसाब से ग्रीन सेस की कटौती की जाती है। यह नारसन चेकपोस्ट से शुरुआत की तो इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आईं। प्रक्रिया धीमी चल रही है, जिससे सभी वाहनों का ग्रीन सेस नहीं कट पा रहा है। लिहाजा, आईटीडीए के विशेषज्ञों की टीम सिस्टम को अपग्रेड करने में जुटी हुई है।

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