विकसित भारत 2047 सरकार का सपना ही नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है: नबीन*
देहरादून, 30 मई। “विकसित भारत 2047 ट्रांसफॉर्मेटिव रोल ऑफ हायर एजुकेशन” विषय पर शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में एक भव्य अकादमिक कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा, विकसित भारत 2047 का सपना अब केवल सरकार का नहीं बल्कि समस्त 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प बन गया है। वहीं उन्होंने अपनी जन्मभूमि बिहार को ज्ञान और उत्तराखंड को ज्ञान एवं अध्यात्म का अद्भुत संगम बताया।
कार्यक्रम का मुख्य विषय प्रधानमंत्री मोदीजी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका रहा। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास तथा उद्यमिता को नई ऊँचाइयों तक ले जाना होगा।
मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में श्री नितिन नवीन ने कहा कि वे ज्ञान की भूमि से आते हैं और देवभूमि उत्तराखंड में ज्ञान तथा
अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलता
है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जनता से निरंतर संवाद और संवेदनशील नेतृत्व के माध्यम से प्रदेश को नई दिशा दी है। कहा कि उत्तराखंड ने सदैव देश को वीर सैनिक दिए हैं
और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विकसित भारत 2047 का सपना अब केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड भारतीयों का संकल्प बन चुका है। उन्होंने
कहा कि भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था, लेकिन लंबे समय तक देश को गरीबी और पिछड़ेपन का सामना करना
पड़ा। आज “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियानों के माध्यम से
भारत पुनः आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
नितिन नवीन ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारतीय वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और
शोधकर्ताओं ने विश्व को भारत की क्षमता का परिचय कराया। भारत की शोध परंपरा
और अध्यात्म दोनों विश्व के लिए अमूल्य
धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में भारत केवल मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाला देश नहीं बल्कि वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।
देश में सेमीकंडक्टर उद्योग की कई इकाइयां स्थापित की जा रही हैं, जिससे तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद स्टार्टअप
और यूनिकॉर्न संस्कृति ने युवा भारत को नई पहचान दी है। युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देकर ही विकसित भारत का सपना
साकार किया जा सकता है। जनधन खातों
और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली का उल्लेख
करते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों तक
सीधे लाभ पहुंचाना नए भारत की पहचान है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति के साथ-साथ भारत की संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्रीय
सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। अंतिम गांव तक विकास पहुंचाना ही वास्तविक राष्ट्र
निर्माण है। उन्होंने युवाओं, विशेषकर जेन-ज़ी
पीढ़ी को नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण
से जोड़ने का आह्वान किया तथा राजनीति में युवाओं की बढ़ती भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं महिलाओं के
सशक्तिकरण की दिशा में केंद्र सरकार की पहलों की सराहना करते हुए कहा कि नारी
शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को और अधिक अवसर प्रदान करेगा। उत्तराखंड में होमस्टे नीति, ऑल वेदर रोड परियोजना, समान नागरिक संहिता और हरिद्वार कॉरिडोर
जैसी पहलों की भी उन्होंने प्रशंसा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने
अभूतपूर्व प्रगति की है और विकसित भारत का सपना अब प्रत्येक भारतीय का सपना बन
चुका है। उन्होंने कहा कि “रिफॉर्म, परफॉर्म
और ट्रांसफॉर्म” की नीति ने भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। विकसित भारत के निर्माण में प्रबुद्ध वर्ग और शिक्षाविद् अग्रदूत की भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आज
शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकती। शिक्षण संस्थानों में कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, बहुविषयक पाठ्यक्रमों तथा इन्क्यूबेशन सेंटरों को बढ़ावा देना
आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री उद्यमशाला जैसी पहलें युवाओं को
आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा
रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच एक
सशक्त सेतु का कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत विश्व में ज्ञान का अग्रणी केंद्र था और नई शिक्षा नीति उसी गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओं को
भविष्य के लिए तैयार करने, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने पर बल दिया।
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने
विकसित भारत की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए कहा कि विकसित भारत का अर्थ
गरीबी से मुक्त भारत, उत्कृष्ट आधारभूत ढांचे वाला भारत, उच्च शिक्षा में अग्रणी भारत
तथा नवाचार में विश्व का नेतृत्व करने वाला
भारत है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, जैविक कृषि और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। यदि तकनीकी विकास के माध्यम से प्रदेश की समस्याओं का
समाधान खोजा जाए तो उत्तराखंड देश का आदर्श राज्य बन सकता है।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का
उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्ण साक्षरता,
घर-घर बिजली, पानी और सड़क पहुंचाने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। प्रति व्यक्ति
आय पिछले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढी है।
भीख मांगने वाले लगभग 1700 बच्चों को शिक्षा और संरक्षण उपलब्ध कराने के लिए छात्रावासों में रखा गया है। आयुष्मान
योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये तक की
निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है और लाखों लोग इसका लाभ उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को रोजगार
और उद्यमिता से जोड़ना सरकार की
प्राथमिकता है।
आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल नवाचार और शोध की संस्कृति को
मजबूत बनाकर ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में वैश्विक नवाचार सूचकांक में लगभग 40 वें स्थान पर
है और हमें इसे शीर्ष दस देशों में पहुंचाने का
लक्ष्य रखना चाहिए। इसके लिए नवाचार की संस्कृति को स्कूल स्तर से ही विकसित करना
होगा तथा छात्रों को समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना होगा।
उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. त्रिप्ता ठाकुर ने कहा कि यदि
नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया
जाए तो विकसित भारत के लक्ष्य को निर्धारित समय से पहले भी प्राप्त किया जा
सकता है। उन्होंने शिक्षा में डिजिटल
तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक कौशलों के समावेश पर बल दिया।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय
के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत नई शिक्षा नीति राष्ट्र प्रथम की भावना पर आधारित है। यह
नीति भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में
आगे बढ़ाने वाली है। उन्होंने कहा कि कक्षा छह से ही कौशल शिक्षा प्रारंभ करने का
प्रावधान भविष्य की आवश्यकताओं के
अनुरूप है। उन्होंने उच्च शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों से विकसित भारत के लक्ष्य में
सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
कॉन्क्लेव में इस बात पर व्यापक सहमति
बनी कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि शिक्षा
जगत, शोध संस्थानों, उद्योग, युवाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों से ही प्राप्त किया
जा सकता है। उच्च शिक्षा संस्थानों को ज्ञान, कौशल, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के केंद्र के
रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।
अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह
रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट,
शिवालिक समूह के चेयरमैन सुनील कुमार, वाइस चेयरमैन अजय कुमार, विधायक
सहदेव सिंह पुण्डीर, मुन्ना सिंह चौहान, सविता कपूर, डॉ. दुर्गेश पंत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, सुरेंद्र मित्तल, कुसुम कंडवाल,
विश्वास डावर, मीता सिंह एवं अनेक शिक्षाविद्, जनप्रतिनिधि एवं बुद्धिजीवी
उपस्थित रहे।

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