September 19, 2026

विश्वकर्मा के जयकारों से गूंजा पंडाल, बिहार से आए भोजपुरी कलाकारों के भजन “बाबा विश्वकर्मा करिहें बेड़ा पार” ने मन मोहा

देहरादून।* बिहारी महासभा उत्तराखंड, देहरादून द्वारा आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव इस बार भक्ति और भोजपुरी की मिट्टी की खुशबू से सराबोर रहा। हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज के प्रांगण में सजा भव्य पंडाल देर शाम तक “जय श्री विश्वकर्मा” के जयकारों से गूंजता रहा। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बिहार से विशेष रूप से बुलाए गए भोजपुरी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य जागरण रहा।

उल्लेखनीय है कि *बिहारी महासभा पिछले 20 वर्षों से देहरादून में सामाजिक स्तर पर जन-जागरण कर रही है।* महासभा द्वारा उत्तराखंड की धरती पर समाज के सहयोग से बिहार की संस्कृति को बचाए रखने के लिए लगातार कई प्रयास किए गए हैं। सभा द्वारा हर साल छठ पूजा, बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा, विश्वकर्मा दिवस, हरतालिका तीज जैसे बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही बीच-बीच में रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जांच शिविर जैसे जनहित के कार्यक्रम भी कराए जाते हैं, ताकि समाज सेवा और अपनी जड़ों से जुड़ाव दोनों बना रहे। विश्वकर्मा पूजनोत्सव भी इसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जागरण की शुरुआत में बिहार की प्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायिका प्रियंका मौर्या ने जब भगवान विश्वकर्मा के भजनों की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया। उनके द्वारा गाए गए “चलऽ हो विश्वकर्मा बाबा के धाम” और “बाबा विश्वकर्मा करिहें बेड़ा पार” जैसे भजनों पर दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।

पदाधिकारियों ने रखे विचार*

 

*अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा,* “आज पंडाल में जो ऊर्जा दिखी, वो बताती है कि हम देहरादून में रहते हुए भी पूर्वांचल और बिहार को दिल में जिंदा रखे हैं। 20 साल की हमारी मेहनत आज रंग ला रही है।” बिहार हमारी जन्मभूमि है और उत्तराखंड हमारी कर्म भूमि है हम समाज के हर वर्ग के लोगों से सहयोग लेकर उनके बीच रहकर आगे बढ़ रहे हैं।।

 

 

*सचिव चंदन कुमार झा ने कहा,* “भोजपुरी जागरण का उद्देश्य अपनी संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना था और नंदिनी शर्मा जी ने इसे बखूबी पूरा किया।” संगठन हमेशा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम करते रहती है यही हमारी सभा की पहचान है ।

 

*कोषाध्यक्ष रितेश कुमार ने कहा,* “सभी सहयोगियों के आर्थिक सहयोग से ही इतना बड़ा आयोजन सफल हो पाया। महासभा का एक-एक रुपया समाज के उत्थान के लिए ही खर्च होगा।”

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