करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और राज्य को राजस्व प्राप्ति को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, परियोजना में किसी प्रकार का अनधिकृत वित्तीय विचलन नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक मद पर उसी सीमा तक व्यय किया जाएगा, जितनी धनराशि स्वीकृत की गई है। प्राक्कलन का पुनरीक्षण स्वीकार न किए जाने का प्रावधान भी किया गया है। योजना के अंतर्गत खरीद एवं निर्माण संबंधी कार्यों में उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 सहित लागू नियमों और शासनादेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
*पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होगा क्रियान्वयन*
परियोजना के प्रभावी अनुश्रवण के लिए कार्यस्थल पर सूचना पट्ट लगाया जाएगा, जिसमें स्वीकृत कार्य का नाम, स्वीकृति वर्ष, स्वीकृत लागत, कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार का नाम अंकित किया जाएगा। कार्य प्रारंभ होने से पहले, निर्माण के दौरान तथा कार्य समाप्त होने के बाद की तस्वीरें और वीडियो भी सुरक्षित रखे जाएंगे।
कार्यदायी संस्था के साथ निर्धारित प्रारूप में समझौता ज्ञापन (MOU) हस्ताक्षरित करना, परियोजना को पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर अपलोड करना तथा वित्तीय एवं भौतिक प्रगति का विवरण शासन को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। संबंधित अधिशासी अभियंता को परियोजना के औचित्य, आगणन की लागत एवं दरों की उपयुक्तता तथा कार्य की समयबद्धता और गुणवत्ता के लिए उत्तरदायी बनाया गया है।
स्वीकृत धनराशि का उपयोग 31 मार्च, 2027 तक सुनिश्चित करना होगा। परियोजना के क्रियान्वयन में बजट मैनुअल, वित्तीय हस्तपुस्तिका, अधिप्राप्ति नियमावली तथा मितव्ययता से संबंधित शासनादेशों के प्रावधानों का पालन भी अनिवार्य होगा।
*पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम*
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्वतीय क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप आधारभूत संरचनाओं के विकास, पेयजल सुविधाओं के विस्तार और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। गैरसैंण नगर एवं आसपास की आबादी के लिए रामगंगा नदी पर बांध निर्माण परियोजना को मिली प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परियोजना के पूर्ण होने पर गैरसैंण और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र की दीर्घकालिक पेयजल आवश्यकताओं की योजना बनाने तथा भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी आधार तैयार होगा।
**मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो, ताकि विकास का लाभ आमजन तक पहुंचे।

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