February 16, 2026

लोकभवन घेराव में उमड़ा जनसैलाब, प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने भरी हुंकार; 2027 की तैयारी का बड़ा संकेत

कांग्रेस की लोकभवन घेराव रैली ने प्रदेश की राजनीति में नया संदेश दिया। परेड ग्राउंड से लोकभवन कूच से पहले मंच पर प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत तमाम वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, लेकिन इस पूरे आयोजन के केंद्र में रहे प्रदेश के कद्दावर नेता प्रीतम सिंह।

 

घेराव से पहले पूरे प्रदेश में बैठकों का दौर चलाकर संगठन को सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक लामबंद करना और कार्यक्रम की विस्तृत रणनीति तैयार करना—यह सब प्रीतम सिंह के नेतृत्व में हुआ। पार्टी हाईकमान ने उन्हें रैली का संयोजक बनाकर स्पष्ट संकेत दिया कि संगठनात्मक क्षमता और जनआधार के लिहाज़ से उन पर भरोसा कायम है।

 

राजनीतिक गलियारों में इस रैली को 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के रूप में भी देखा जा रहा है। जिस प्रकार से प्रीतम सिंह ने प्रदेश भर में समन्वय स्थापित किया और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया, उससे यह संदेश गया कि वे न केवल संगठन के मजबूत स्तंभ हैं, बल्कि आगामी 2027 चुनाव में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनने की क्षमता और स्वीकार्यता भी रखते हैं।

 

पार्टी में जब-जब जिम्मेदारी मिली—चाहे देहरादून में जिला पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस का बोर्ड बनवाने की रणनीति हो या बड़े जनआंदोलनों को धार देना—प्रीतम सिंह ने उसे पूरी प्रतिबद्धता से निभाया।

 

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह रैली केवल जन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का भी संकेत थी। जिस प्रकार से प्रीतम सिंह ने संगठनात्मक क्षमता और जनसमर्थन का प्रदर्शन किया, उससे उन्हें प्रदेश स्तर पर कांग्रेस के प्रमुख नेता और संभावित चुनावी चेहरा के रूप में देखा जा रहा है।

 

घेराव में उमड़ी भीड़ और कार्यकर्ताओं का उत्साह इस बात की ओर इशारा करता महिला अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, जंगली जानवरों के हमले, पलायन और आपदा पीड़ितों के मुद्दों को लेकर हुए इस घेराव में उमड़ी भीड़ ने यह भी संकेत दिया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता में भी बदलाव की चाह है।

 

इस रैली ने एक ओर सरकार को घेरा, तो दूसरी ओर यह संदेश भी दिया कि कांग्रेस में संगठनात्मक ऊर्जा मौजूद है—और उस ऊर्जा के केंद्र में प्रदेश नेता के रूप में प्रीतम सिंह उभरते दिख रहे हैं।

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