देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ती नज़र आ रही है। डीडीहाट से भाजपा विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल ने अपनी ही सरकार और संगठन को घेरते हुए दायित्वधारियों की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
विधायक चुफाल का आरोप है कि पिथौरागढ़ जिले में अयोग्य लोगों को दायित्व सौंपे गए हैं, जो ना सिर्फ जनहित के कार्यों में बाधा बन रहे हैं, बल्कि विधायकों के कामकाज में भी जबरन हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे दायित्वधारियों को जल्द से जल्द हटाया जाना चाहिए, ताकि संगठन की साख बनी रहे और योजनाएं प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंच सकें।
वहीं, खेल परिषद में उपाध्यक्ष पद पर दायित्व संभाल रहे हेमराज विष्ट ने पलटवार करते हुए चुफाल पर ही सवाल दाग दिए। उन्होंने विधायक द्वारा “योग्य-अयोग्य” की परिभाषा पूछी है। कहा, “क्या विधायक की बेटी को तिलु रौतेली जैसा सम्मान मिलना उनकी योग्यता का प्रमाण था? अगर नहीं, तो फिर सवाल दूसरों पर क्यों?”
उन्होंने आगे कहा कि विधायक की बेटी को जिलापंचायत उपाध्यक्ष बनाया क्या वह इसके योग्य थीं।
हेमराज विष्ट द्वारा जारी अपने बयान कहा कि वे लंबे समय से भाजपा के कार्यकर्ता हैं और उन्हें मुख्यमंत्री व संगठन की स्वीकृति से जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह विवाद सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के भीतर उभरती अंदरूनी खींचतान का संकेत भी है। पार्टी के अंदर टकराव की यह स्थिति आने वाले दिनों में और गंभीर हो सकती है।

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