September 13, 2026

यूआईआईडीबी के नाम पर 18 हेक्टेयर भूमि, कांग्रेस कर रही 7 हजार बीघा का दुष्प्रचार: भट्ट

देहरादून 12 सितंबर। भाजपा ने यूडीबीआई को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि विकास विरोधियों एवं भ्रष्टाचारियों को राज्य की तरक्की हजम नहीं हो रही है।

प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने कहा कि धामी सरकार में यूआईडीबी भी राज्य की जीडीपी को दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर तेजी से आगे बढ़ रही है। तय नियमावली के अनुसार बोर्ड जमीन हासिल कर रहा है और वर्तमान में अनुपयोगी जमीनों का निवेश और रोजगार सृजन की दृष्टि से आर्थिक प्रबंधन किया जाएगा। विपक्ष सिर्फ चुनावी लाभ के लिए झूठे, बेबुनियादी आरोप लगाकर जनता में भ्रम फैलाने की असफल कोशिश कर रहा है।

जारी बयान में प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस को आईना दिखाया कि अपनी सरकारों में अधोगिक विकास के नाम पर जमीनों की बंदरबांट और संसाधनों के लूट का लाइसेंस वे किस तरह खुलेआम देते नजर आते थे। लिहाजा अब जब प्रदेश में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में संतुलित और तीव्र गति से विकास हो रहा है तो कांग्रेस के नेताओं को विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा हो सकता है। यही वजह है कि उनकी दिमागी गड़बड़ और अपने कार्यकाल के भ्रष्टाचारी अनुभव, उन्हें नकारत्मक रवैया अपनाने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से राज्य में किए जा रहे विकास कार्यों पर उठाए जा रहे सवालों पर कांग्रेस को आईंना दिखाते हुए उत्तराखंड के विकास का दुश्मन बताया। दरअसल लगातार पराजय के बाद कांग्रेस बौखलाई हुई है यही वजह है कि उन्हें राज्य में हो रहा विकास हजम नहीं हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी के नाम पर अभी सिर्फ 18 हेक्टेयर भूमि है। ऐसे में राज्य की सात हजार बीघा से अधिक भूमि निजी कंपनियों को देने की बात पूरी तरह गलत है। जबकि शीशे की तरह स्पष्ट है कि राज्य में रोजगार और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से यूआईआईडीबी का गठन किया गया था जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को दुगना करने के लक्ष्य से काम कर रही है । आज बोर्ड के जरिए राज्य के संसाधनों का राज्य के विकास की दिशा में बेहतर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसके लिए राज्य में पर्यटन, शिक्षा, कृषि, उद्यान के सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश हो, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तरह केंद्र सरकार की तर्ज पर राज्य की अनुपयोगी भूमि का नियमों के तहत आर्थिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

दरअसल सब कुछ नियमानुकूल, पारदर्शी और नियोजित तरीके से किया जा रहा है, जिसके चलते बढ़ती विकास की रफ्तार और सम्भावित तरक्की को भी जनता अनुभव कर रही है। प्रदेश के सवा करोड़ लोगों का पीएम मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार की इन नीतियों पर पूरा भरोसा है। जिसे वह बार बार लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज भी कर चुकी है और आने वाले विधानसभा चुनाव में भी तस्वीर यही रहने वाली है। इसलिए अपने लिए 27 में स्कोप समाप्त होता देख कांग्रेस का हाजमा खराब हो गया है। उन्होंने आईना दिखाया कि आज कांग्रेस को राज्य में होने वाला निवेश खटक रहा है। यदि यही सोच एनडी तिवारी सरकार में भाजपा की रही होती, तो उत्तराखंड में सेलाकुईं, रोशनाबाद हरिद्वार, रुद्रपुर सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं होते। उद्योगों, निवेशकों को निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध कराना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी होती हैं। देश में आईटी, डाटा सेंटर, सेमी कंडक्टर चिप इंडस्ट्री, ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री सेक्टर में दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां निवेश को आ रही हैं। खुद कांग्रेस की तेलंगाना, कर्नाटक सरकारों में निवेश के लिए उद्योग लाए जा रहे होंगे। क्या ये उद्योग अपने साथ जमीन बाहर से लेकर आ रहे हैं। ज़बाब होगा नहीं, क्योंकि उन्हें निवेश को संसाधन वहां की कांग्रेस सरकारें ही उपलब्ध करा रही होगी। वहीं आरोप लगाया कि उत्तराखंड कांग्रेस की सोच बेहद सीमित और संकीर्ण हो चुकी है। सुझाव देते हुए कहा कि कांग्रेस को प्रदेश के विकास और सरकारी भूमि से जुड़े तथ्यों पर राजनीति करने के बजाय पहले अपने शासनकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए। सच यह है कि कांग्रेस का इतिहास उत्तराखंड और जनहित के मुद्दों पर विरोधाभासी रहा है। जिस कांग्रेस ने उत्तराखंड राज्य निर्माण का विरोध किया, वही आज प्रदेश में तेजी से हो रहे ढांचागत और आर्थिक विकास को देखकर बौखलाहट में निराधार आरोप लगा रही है।

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