February 13, 2026

गैंगस्टर था विक्रम शर्मा, दून में सिल्वर सिटी मॉल में मारी गई गोली

देहरादून में शुक्रवार सुबह सिटी सेंटर स्थित जिम के बाहर हुई सनसनीखेज हत्या ने अब नया मोड़ ले लिया है। 45 वर्षीय विक्रम शर्मा, जिन्हें पहले स्टोन क्रशर संचालक के रूप में पहचाना गया था, के आपराधिक इतिहास को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।

 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, विक्रम शर्मा पर 50 से अधिक मुकदमे दर्ज थे, जिनमें 30 से अधिक हत्या के मामले शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में उनके तार झारखंड के एक गैंग से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।काशीपुर से जुड़े विक्रम शर्मा वर्तमान में देहरादून के रेसकोर्स क्षेत्र में रह रहे थे। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह जिम पहुंचे थे। लगभग 10:30 बजे जैसे ही वह नीचे उतरे, घात लगाए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हमलावर बाइक से फरार हो गए।

सूत्रों का यह भी कहना है कि विक्रम शर्मा को किसी खतरे का अंदेशा था और वह हथियार लेकर आया था, लेकिन हमलावरों ने उसे प्रतिक्रिया का मौका तक नहीं दिया।

पुलिस अब इस हत्याकांड को संभावित गैंगवार से जोड़कर जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और शहरभर में नाकेबंदी कर संदिग्धों की तलाश जारी है।

 

देहरादून, जो लंबे समय तक शांत शहर के रूप में जाना जाता रहा, अब संगठित अपराध और गैंगवार जैसी घटनाओं से जूझता दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही आपराधिक वारदातों ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

क्या दून में संगठित गैंगों की सक्रियता बढ़ रही है? क्या यह बाहरी आपराधिक नेटवर्क की एंट्री का संकेत है? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल शहर में दहशत और चिंता का माहौल है

 

विक्रम-अखिलेश से जुड़ी चर्चित घटनाएं

 

– 2 नवंबर 2007- साकची आम बागान के पास श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या

– 15 मार्च 2008 – साकची में रवि चौरसिया पर फायरिंग

– 20 मार्च 2008- साकची में पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग

– 16 मई 2008 – साकची में श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे के घर पर फायरिंग

– 25 जुलाई- बिष्टुपुर में कांग्रेसी नेता नट्‌टू झा के कार्यालय पर गोली चली

– 17 अगस्त 2008- बर्मामाइंस में अपराधी परमजीत सिंह के भाई सत्येंद्र सिंह की ससुराल में फायरिंग

– 28 अगस्त 2008- साकची में ठेकेदार रंजीत सिंह पर फायरिंग

– 17 सितंबर 2008- एमजीएम अस्पताल मोड़ पर बंदी परमजीत सिंह पर फायरिंग

– 4 अक्टूबर 2008-बिष्टुपुर में बाग-ए-जमशेद के पास टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या

– 2008- बिष्टुपुर में कीनन स्टेडियम के पास ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या

 

थ्री ‘पी’ को मैनेज करने में माहिर था विक्रम

 

मृदुभाषी, स्वभाव से शांत विक्रम शर्मा को व्यावहारिक माना जाता है। जिससे लाभ दिखा, वह उसे अपना बनाने की कोशिश करता। अपना सिक्का जमाने में उसने थ्री ‘पी’, यानी पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस को महत्वपूर्ण समझा। काबरा अपहरण कांड के बाद अखिलेश शहर का डाॅन बन चुका था। अखिलेश के आपराधिक साम्राज्य को चमकाने में विक्रम ने इसी रिश्ते का खूब उपयोग किया। 2004 से 2009 के बीच शहर में पदस्थापित थाना प्रभारी से डीएसपी स्तर के कई अफसर उसके प्रभाव में थे। इसका फायदा यह हुअा कि अखिलेश के गुर्गे आपराधिक वारदात करते और पुलिस उसके विरोधियों पर केस करती। तब ददई यादव व बड़ा निजाम का गिरोह उनका विरोध करते थे। नतीजा ददई दुबे और बड़ा निजाम मारे गए। उसकी विभिन्न दलों के नेताआें से भी अच्छे रिश्ते थे। झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन व आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो तक पहुंच थी। मीडिया से जुड़े कुछ लोगों से भी विक्रम के संबंध थे।

ट्रांसपोर्टर की हत्या के बाद उसकी पत्नी से भाई की शादी

 

संपत्ति के लिए विक्रम शर्मा ने अपनों की हत्या कराने में परहेज नहीं की। सोनारी आशियाना में रहनेवाले ट्रांसपोर्टर व होटल कारोबारी अशोक शर्मा की हत्या का आरोप विक्रम शर्मा, अखिलेश सिंह, पिंकी शर्मा और हरीश अरोड़ा पर लगा था। पिंकी शर्मा अशोक की पत्नी थी। करोड़ों का कारोबारी अशोक का साकची में ट्रांसपोर्ट का कारोबार और आवास में होटल था। पुलिस के अनुसार, संपत्ति के लालच में अशोक की हत्या करा दी गई। हत्याकांड की जांच पुलिस और बाद में सीआईडी ने की। दोनों एंजेसियां साक्ष्य नहीं जुटा पाई और न्यायालय ने आरोपियों को बरी कर दिया। इसके बाद विक्रम ने दिवंगत अशोक की पत्नी पिंकी शर्मा की शादी अपने छोटे भाई अरविंद शर्मा से करा दी। हरीश अरोड़ा का साकची में अपना मार्केट कॉम्प्लेक्स है।

 

मार्शल आर्ट्स सिखाने के लिए चाइनीज फिल्मों का सहारा

 

शिष्य को शारीरिक रूप से फौलादी बनाने के लिए विक्रम शर्मा उसे मार्शल आर्ट्स से संबंधित चाइनीज फिल्म दिखाता था। ब्लैक बेल्टर विक्रम सिदगोड़ा के जंगल मैदान में बच्चों को मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देता था। अखिलेश भी उसके पास जाता था। अखिलेश के पिता चंद्रगुप्त सिंह झारखंड पुलिस एसोसिएशन के नेता थे और एक खास जाति के अधिकारियों के बीच गहरी पकड़ थी। चाइनीज फिल्म दिखाने के पीछे अखिलेश को हार्डकाेर बनाने की मंशा थी। मार्शल आर्ट वाली कई चाइनीज फिल्मों में शिष्य को गुरु पर मर-मिटते दिखाया गया है। कड़ी ट्रेनिंग ने किशोरावस्था में अखिलेश पर गहरी छाप छोड़ी और वह आपराधिक गुरु का प्रिय शिष्य बना। इस बीच विक्रम ने दिवगंत अशोक शर्मा के कारोबार पर दखल कर लिया था, जिसमें अखिलेश को जोड़ लिया था।

About The Author