October 12, 2026

जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें अधिकारी, लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के तपोवन रोड स्थित क्षत्रिय चेतना मंच में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने लाभार्थियों को कृषि यंत्र, मशरूम मिनीकिट तथा बाल विकास विभाग की महालक्ष्मी एवं किशोरी किट का वितरण भी किया।

 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों में प्राप्त जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन समस्याओं के समाधान में समय लगना आवश्यक हो, उनके संबंध में शिकायतकर्ता को स्पष्ट जानकारी दी जाए। उन्होंने कहा कि आम जनता को अपने कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से प्रदेश में सेवा संकल्प अभियान संचालित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अनेक नई उपलब्धियां हासिल की हैं। आज देश विकास के नए आयाम स्थापित करते हुए विकसित भारत के संकल्प की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी भावना के अनुरूप राज्य सरकार सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जनसेवा और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के साथ ही लोगों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है।।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पूर्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दो चरणों में 6.5 लाख से अधिक लोगों ने भागीदारी की। इस अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों की समस्याओं का समाधान करने के साथ ही पात्र नागरिकों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि शासन-प्रशासन स्वयं जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझे और उनका समाधान सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुउद्देशीय शिविरों का उद्देश्य केवल विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाना नहीं, बल्कि सरकार की योजनाओं, सेवाओं और सुविधाओं को सीधे जनता तक पहुंचाना है। इन शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान के लिए मौके पर ही आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचे और कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव अथवा प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण योजनाओं से वंचित न रहे।

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