उत्तराखंड के पहाड़ इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। एक तरफ जंगलों में धधकती आग और दूसरी तरफ व्यवस्था की बेरुखी। ताजा और बेहद हृदयविदारक मामला चमोली जिले के आदिबद्री तहसील से सामने आया है, जहां जंगल की बेकाबू आग ने एक महिला को असमय ही मौत की नींद सुला दिया। जिला आपदा कंट्रोल रूम चमोली ने इस दर्दनाक घटना की आधिकारिक पुष्टि की है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बूंगा गांव के पाटिखाल तोक निवासी 52 वर्षीय सुरेशी देवी मंगलवार देर शाम हमेशा की तरह अपनी गोशाला की तरफ जा रही थीं। अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा बूंगा के जंगल में लगाई गई आग तेज आंधी-तूफान के सहारे सीधे गोशाला तक पहुंच गई। सुरेशी देवी इस विकराल आग की चपेट में आ गई। इससे पहले कि ग्रामीण महिला को बचा पाते या अस्पताल ले जा पाते, सुरेशी देवी ने तड़प-तड़प कर मौके पर ही दम तोड़ दिया।
धनपुर रेंज गौचर के वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर नेगी ने मीडिया को बताया कि उन्हें देर रात ग्रामीणों के जरिए सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत वनकर्मियों को रवाना किया गया। फिलहाल वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर जानकारी जुटाने और आगे की कार्यवाही में जुट गए हैं।
उत्तराखंड के जंगलों में लगी यह आग सिर्फ पेड़ों को नहीं, बल्कि इंसानी जिंदगियों और उनके आशियानों को भी लील रही है। सवाल यह है कि क्या वन महकमा सिर्फ आग लगने के बाद की मुस्तैदी दिखाने के लिए ही बना है?
सवाल यह भी है कि जब तक आपदा के इंतजाम सिर्फ घटना के बाद मुआवजा बांटने तक सीमित रहेंगे, तब तक पहाड़ के लोग और वनकर्मी ऐसे ही असमय काल के गाल में समाते रहेंगे। सरकार को जमीनी हकीकत को स्वीकार करते हुए जंगलों में सुलगती आग के नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

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