अल्मोड़ा: कोसी समेत अन्य नदियों में हर साल कई जिंदगियां असमय काल के गाल में समा जाती हैं। एक और हादसे में 2 युवकों की कोसी नदी में डूबने से मौत हो गई। इस दुखद हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन इन हादसों से कोई सबक क्यों नहीं लेता? आखिर क्यों प्रशासन हमेशा किसी बड़े हादसे के बाद ही जागता है?
नगर के दुगालखोला निवासी 26 वर्षीय सोनू कनवाल और बागेश्वर निवासी, हाल हल्द्वानी निवासी धीरज सिंह गढ़िया की कोसी नदी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। ये सिर्फ दो मौतें नहीं हैं, बल्कि यह उस प्रशासनिक नाकामी का ताजा दस्तावेज है, जो हर साल किसी लाश के नदी से निकलने के बाद ही एक्शन में आता है।
अल्मोड़ा जिले में यह कोई पहला हादसा नहीं है। हर साल गर्मी का सीजन शुरू होते ही कोसी बाजार से लेकर सोमेश्वर के बीच नदी के किनारे पिकनिक स्पॉट में तब्दील हो जाते हैं। सुयाल और अन्य नदियों में भी कुछ ऐसी स्थिति रहती है। कुछ लोग गर्मी से राहत पाने तो कुछ हुड़दंगी नशे के सुरूर में बिना सुरक्षा उपायों के उफनती या गहरी नदियों में उतर जाते हैं।
हैरानी की बात यह है कि प्रशासन को इस बात का बखूबी इल्म होता है कि गर्मी बढ़ते ही नदियों पर भीड़ बढ़ेगी। लेकिन सिस्टम की नींद हमेशा हादसे के बाद ही खुलती है। जैसे ही कोई डूबता है, प्रशासन तुरंत जागता है। खानापूर्ति के लिए मछली आखेट और नहाने पर प्रतिबंध के कागजी आदेश जारी होते हैं, कुछ अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी जाती है। लेकिन अगले साल फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति पैदा हो जाती है।
पहाड़ की नदियों का मिजाज मैदानी इलाकों से बिल्कुल अलग होता है। कई बार बाहर से आने वाले सैलानियों या स्थानीय युवाओं को नदी की गहराई और वहां मौजूद डेंजर प्वाइंट्स का अंदाजा नहीं होता। लोग सीधे मौत के कुएं में उतर जाते हैं। सवाल यह है कि प्रशासन द्वारा क्यों कोई ऐसी स्थायी एसओपी नहीं बनाई जाती, जो हर साल गर्मी का सीजन शुरू होते ही स्वतः ही लागू हो जाए, ताकि किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े।
तस्वीर का दूसरा पहलू हमारी खुद की लापरवाही भी है। नदियों में नहाना या तैरना कोई एडवेंचर या सुखद अनुभव नहीं है, अगर आपके पास सुरक्षा उपकरण न हों या आपको उस जगह की गहराई का अंदाजा न हो। खासकर पिकनिक के नाम पर नदियों के किनारे नशा करने और फिर पानी में उतरने की सनक सीधे-सीधे मौत को दावत देना है। लोगों को भी यह समझना होगा कि उनकी एक लापरवाही पूरे परिवार को ताउम्र का मातम दे जाती है।
जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि दो युवकों के नदी में डूबने का मामला बेहद चिंतनीय है। भविष्य में ऐसे हादसे न हो इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं, इस पर प्रशासन काम करेगा। नदी के डेंजर प्वाइंट्स पर चेतावनी बोर्ड लगाने के साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा और एक ठोस निगरानी तंत्र लागू करने की कार्यवाही की जाएगी।

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